शिवार्चनविधिः — देवतानां पाशुपतव्रतप्राप्तिः तथा पशुपाशविमोक्षणम् (अध्याय ८०)
प्रणेमुस् तुष्टुवुश् चैव प्रीतिकण्टकितत्वचः विज्ञाप्य शितिकण्ठाय पशुपाशविमोक्षणम्
praṇemus tuṣṭuvuś caiva prītikaṇṭakitatvacaḥ vijñāpya śitikaṇṭhāya paśupāśavimokṣaṇam
भक्ति-रस से रोमांचित होकर उन्होंने प्रणाम किया और स्तुति की; फिर शितिकण्ठ (नीलकण्ठ) से पशु-पाश-विमोक्षण के विषय में निवेदन किया।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimiṣāraṇya)