शिवार्चनविधिः — देवतानां पाशुपतव्रतप्राप्तिः तथा पशुपाशविमोक्षणम् (अध्याय ८०)
नानाप्रभावसंयुक्ता नानाभोगरतिप्रियाः नीलोत्पलदलप्रख्याः पद्मपत्रायतेक्षणाः
nānāprabhāvasaṃyuktā nānābhogaratipriyāḥ nīlotpaladalaprakhyāḥ padmapatrāyatekṣaṇāḥ
वे नाना प्रकार के प्रभाव और तेज से युक्त, अनेक भोगों और रतियों में अनुरक्त थीं। नीलकमल की पंखुड़ियों-सी दीप्त, उनके दीर्घ नेत्र कमल-पत्र के समान थे।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya)