उपलेपनादिकथनम्
Vastraputa-jala, Ahimsa, and Conduct in Shiva Worship
तस्मात्तु परिहर्तव्या हिंसा सर्वत्र सर्वदा मनसा कर्मणा वाचा सर्वदाहिंसकं नरम्
tasmāttu parihartavyā hiṃsā sarvatra sarvadā manasā karmaṇā vācā sarvadāhiṃsakaṃ naram
इसलिए सर्वत्र और सदा हिंसा का त्याग करना चाहिए—मन, कर्म और वाणी से। मनुष्य को नित्य अहिंसक रहना चाहिए; यही अहिंसा क्रूरता और द्वेष के पाश को ढीला कर बंधित जीव (पशु) को प्रभु शिव (पति) की ओर उन्मुख करती है।
Suta Goswami (narrating Linga Purana teachings to the sages of Naimisharanya)