उपलेपनादिकथनम्
Vastraputa-jala, Ahimsa, and Conduct in Shiva Worship
कार्यमभ्युक्षणं नित्यं स्नपनं च विशेषतः त्रैलोक्यमखिलं हत्वा यत्फलं परिकीर्त्यते
kāryamabhyukṣaṇaṃ nityaṃ snapanaṃ ca viśeṣataḥ trailokyamakhilaṃ hatvā yatphalaṃ parikīrtyate
शिवलिंग का नित्य अभ्युक्षण और विशेषतः स्नापन अवश्य करना चाहिए। कहा गया है कि इसका फल इतना महान है कि त्रैलोक्य के समस्त विनाश के बाद जो फल वर्णित होता है, उसके तुल्य ही इसका पुण्य माना गया है।
Suta Goswami