Adhyaya 75: Nishkala–Sakala Shiva, Twofold Linga, and the Supremacy of Dhyana-Yajna
सूत उवाच परमार्थविदः केचिद् ऊचुः प्रणवरूपिणम् विज्ञानमिति विप्रेन्द्राः श्रुत्वा श्रुतिशिरस्यजम्
sūta uvāca paramārthavidaḥ kecid ūcuḥ praṇavarūpiṇam vijñānamiti viprendrāḥ śrutvā śrutiśirasyajam
सूत बोले—हे श्रेष्ठ ब्राह्मणो! कुछ परमार्थ-ज्ञानी मुनियों ने वेद-शिरोभाग से प्रकट उस प्रभु पतीश्वर को सुनकर कहा कि मोक्षदायक परम विज्ञान प्रणव (ॐ) के ही स्वरूप में है।
Suta