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Shloka 26

Adhyaya 73 — त्रिपुरदाहे ब्रह्मस्तवः

Brahmā’s Hymn in the Context of Tripura’s Burning

हत्वा भित्त्वा च भूतानि दग्ध्वा सर्वमिदं जगत्

hatvā bhittvā ca bhūtāni dagdhvā sarvamidaṃ jagat

सब प्राणियों का संहार कर, उन्हें विदीर्ण कर, और इस समस्त जगत् को दग्ध करके प्रभु समस्त प्रकट रूपों को प्रलय में ले जाते हैं। पाशों से बँधे पशुओं को पाशों से समेटकर, पति शिव की अधीनता में अव्यक्त में लीन कर देते हैं।

हत्वाhaving slain/destroyed
हत्वा:
भित्त्वाhaving split/shattered
भित्त्वा:
and
:
भूतानिbeings/created entities (bhūtas)
भूतानि:
दग्ध्वाhaving burned
दग्ध्वा:
सर्वम्all
सर्वम्:
इदम्this
इदम्:
जगत्world/universe
जगत्:

Suta Goswami