Adhyaya 72 — Puradāha: Rudra’s Cosmic Chariot, Pāśupata-Vrata, and Brahmā’s Shiva-Stuti
अथ विभाति विभोर्विशदं वपुर् भसितभासितमंबिकया तया सितमिवाभ्रमहो सह विद्युता नभसि देवपतेः परमेष्ठिनः
atha vibhāti vibhorviśadaṃ vapur bhasitabhāsitamaṃbikayā tayā sitamivābhramaho saha vidyutā nabhasi devapateḥ parameṣṭhinaḥ
तब सर्वव्यापी परमेश्वर का निर्मल स्वरूप प्रकट होकर दैदीप्यमान हुआ—पवित्र भस्म की प्रभा और अम्बिका की सन्निधि से उज्ज्वल। वह आकाश में बिजली से युक्त श्वेत मेघ के समान अद्भुत दीख पड़ा—देवों के स्वामी परमेष्ठिन का तेजस्वी रूप।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya)