Adhyaya 72 — Puradāha: Rudra’s Cosmic Chariot, Pāśupata-Vrata, and Brahmā’s Shiva-Stuti
सूत उवाच य इमं शृणुयाद्द्विजोत्तमा भुवि देवं प्रणिपत्य पठेत् स च मुञ्चति पापबन्धनं भवभक्त्या पुरशासितुः स्तवम्
sūta uvāca ya imaṃ śṛṇuyāddvijottamā bhuvi devaṃ praṇipatya paṭhet sa ca muñcati pāpabandhanaṃ bhavabhaktyā puraśāsituḥ stavam
सूत बोले—हे श्रेष्ठ द्विजो! जो पृथ्वी पर इस स्तव को सुनता है, या देव के चरणों में प्रणाम करके इसका पाठ करता है, वह पुरों के शासक भव (शिव) की भक्ति से पाप-बन्धन से मुक्त हो जाता है।
Suta