Adhyaya 71: पुरत्रयवृत्तान्तः—ब्रह्मवरदानम्, मयकृतत्रिपुर-निर्माणम्, विष्णुमाया-धर्मविघ्नः, शिवस्तुति, त्रिपुरदाहोपक्रमः
जनासक्ता बभूवुस्ता विनिन्द्य पतिदेवताः अद्यापि गौरवात्तस्य नारदस्य कलौ मुनेः
janāsaktā babhūvustā vinindya patidevatāḥ adyāpi gauravāttasya nāradasya kalau muneḥ
वे स्त्रियाँ पति-देवता का तिरस्कार करने के कारण निंदित हुईं और लोकासक्ति में पड़ गईं। फिर भी कलियुग में उस मुनि नारद के प्रति गौरव-भाव से यह बात आज भी स्मरण की जाती और उपदेशित होती है।
Suta Goswami