Adhyaya 71: पुरत्रयवृत्तान्तः—ब्रह्मवरदानम्, मयकृतत्रिपुर-निर्माणम्, विष्णुमाया-धर्मविघ्नः, शिवस्तुति, त्रिपुरदाहोपक्रमः
श्रुत्वा प्रभोस्तदा वाक्यं प्रणेमुस्तुष्टुवुश् च ते अप्येतदन्तरे देवी देवमालोक्य विस्मिता
śrutvā prabhostadā vākyaṃ praṇemustuṣṭuvuś ca te apyetadantare devī devamālokya vismitā
प्रभु के वचन सुनकर वे नतमस्तक हुए और स्तुति करने लगे। इसी बीच देवी, देव को देखकर विस्मित रह गईं।
Suta Goswami (narrating; internal scene describes Devas and Devī reacting to Śiva’s words)