Adhyaya 70: आदिसर्गः—महत्-अहङ्कार-तन्मात्रा-भूतसृष्टिः, ब्रह्माण्डावरणम्, प्रजासर्गः, त्रिमूर्ति-शैवाधिष्ठानम्
सृजते ग्रसते चैव रक्षते च त्रिभिः स्वयम् आदित्वाद् आदिदेवो ऽसाव् अजातत्वाद् अजः स्मृतः
sṛjate grasate caiva rakṣate ca tribhiḥ svayam āditvād ādidevo 'sāv ajātatvād ajaḥ smṛtaḥ
वह स्वयं अपनी त्रिविध शक्तियों से सृष्टि करता, संहरता (ग्रसता) और रक्षा करता है। आदिकारण होने से वह ‘आदि-देव’ है, और अजन्मा होने से ‘अज’ स्मरणीय है।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya)