वंशानुवर्णनम् — सात्वतवंशः, स्यमन्तक-प्रसङ्गः, कृष्णावतारः, शिवप्रसादः (पाशुपतयोगः)
देवक्याः स भयात्कंसो जघानैवाष्टमं त्विति स्मरन्ति विहितो मृत्युर् देवक्यास् तनयो ऽष्टमः
devakyāḥ sa bhayātkaṃso jaghānaivāṣṭamaṃ tviti smaranti vihito mṛtyur devakyās tanayo 'ṣṭamaḥ
देवकी के भय से कंस ने “यह आठवाँ है” ऐसा मानकर (शिशु को) मार डाला; पर स्मरण किया जाता है कि कंस की विधि-नियत मृत्यु देवकी का आठवाँ पुत्र ही था—जो कंस का साक्षात् मृत्यु-रूप बनने वाला था।
Suta Goswami (narrating the Purana to the sages of Naimisharanya)