यदुवंश-प्रवचनम्: हैहय-क्रोष्टु-वंशविस्तारः (कृतवीर्यार्जुनादि, ज्यामघ-विदर्भ-शात्वत-पर्यन्तम्)
ज्यामघस्य मया प्रोक्ता सृष्टिर्वै विस्तरेण वः यः पठेच्छृणुयाद्वापि निसृष्टिं ज्यामघस्य तु
jyāmaghasya mayā proktā sṛṣṭirvai vistareṇa vaḥ yaḥ paṭhecchṛṇuyādvāpi nisṛṣṭiṃ jyāmaghasya tu
ज्यामघ की सृष्टि (वंश-विस्तार) मैंने तुमसे विस्तारपूर्वक कही है। जो ज्यामघ की इस निसृष्टि को पढ़े या सुने, वह पुण्य पाता है और पशु को पाश से मुक्त करने वाले पति-परमेश्वर की ओर उन्मुख होता है।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya)