वासिष्ठकथनम् (आदित्य–सोमवंशवर्णनम् तथा रुद्रसहस्रनाम-प्रशंसा)
मन्त्रवित्परमो मन्त्रः सर्वभावकरो हरः कमण्डलुधरो धन्वी बाणहस्तः कपालवान्
mantravitparamo mantraḥ sarvabhāvakaro haraḥ kamaṇḍaludharo dhanvī bāṇahastaḥ kapālavān
वह मन्त्रों का ज्ञाता है और परम मन्त्र स्वयं है; वह हर—समस्त भावों को प्रकट करने वाला है। कमण्डलु धारण करने वाला तपस्वी भी वही है; वही धनुर्धर, बाणहस्त, और कपालवान शिव है—जो पशु के बंधन का क्षय करता है।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya, within a stuti/nama-style passage)