वासिष्ठकथनम् (आदित्य–सोमवंशवर्णनम् तथा रुद्रसहस्रनाम-प्रशंसा)
लब्धवान् भगवांश्चक्रं कृष्णः कालाग्निसन्निभम् मनोस्तु प्रथमस्यासन् नव पुत्रास्तु तत्समाः
labdhavān bhagavāṃścakraṃ kṛṣṇaḥ kālāgnisannibham manostu prathamasyāsan nava putrāstu tatsamāḥ
भगवान् कृष्ण ने प्रलयाग्नि के समान दहकता चक्र प्राप्त किया। प्रथम मनु के नौ पुत्र थे, जो उसके समान तेजस्वी थे; वे पति (शिव) की आज्ञा से धर्म-व्यवस्था को धारण करते, और उसी की इच्छा से बंधित जीव सृष्टि-चक्रों में प्रवृत्त होते हैं।
Suta Goswami