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Shloka 128

वासिष्ठकथनम् (आदित्य–सोमवंशवर्णनम् तथा रुद्रसहस्रनाम-प्रशंसा)

नीरस्तीर्थश् च भीमश् च सर्वकर्मा गुणोद्वहः पद्मगर्भो महागर्भश् चन्द्रवक्त्रो नभो ऽनघः

nīrastīrthaś ca bhīmaś ca sarvakarmā guṇodvahaḥ padmagarbho mahāgarbhaś candravaktro nabho 'naghaḥ

वही नीरस्तीर्थ है—जिसकी पवित्रता किसी एक तीर्थ तक सीमित नहीं; वही भीम, भय-भक्ति जगाने वाले प्रभु हैं। वही सर्वकर्मा, समस्त कर्मों के कर्ता और अंतर्यामी नियन्ता; गुणोद्वह, गुणों के धारक तथा अतीत आधार। वही पद्मगर्भ, प्रकट जगत्-व्यवस्था का स्रोत; महागर्भ, समस्त लोकों का विराट गर्भ; चन्द्रवक्त्र, चन्द्र-सम शीतल मुख; और नभ—सर्वव्यापी आकाश; अनघ, कर्म-मल से रहित परम पति।

Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya; Sahasranama portion)