देवादिसृष्टिकथनम् (वसिष्ठशोकः, पराशरजन्म, एकलिङ्गपूजा, रुद्रदर्शनम्)
त्वय्येव जीवितं चास्य मुनेर् यत् सुव्रते मम जीवितं रक्ष देहस्य धात्री च कुरु यद्धितम्
tvayyeva jīvitaṃ cāsya muner yat suvrate mama jīvitaṃ rakṣa dehasya dhātrī ca kuru yaddhitam
हे सुव्रते! इस मुनि का जीवन तुम पर ही आश्रित है, और मेरा जीवन भी। मेरे प्राणों की रक्षा करो; इस देह की धात्री बनो और जो हितकर हो वही करो।
Suta (narrating an internal supplication within the story)