देवादिसृष्टिकथनम् (वसिष्ठशोकः, पराशरजन्म, एकलिङ्गपूजा, रुद्रदर्शनम्)
समुत्थाप्य स्नुषां बालाम् ऊचतुर्भयविह्वलौ
samutthāpya snuṣāṃ bālām ūcaturbhayavihvalau
अपनी युवा बहू को उठाकर वे दोनों भय से व्याकुल होकर उससे बोले।
Two elders (householders) within Suta’s narrated episode