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Shloka 16

देवादिसृष्टिकथनम् (वसिष्ठशोकः, पराशरजन्म, एकलिङ्गपूजा, रुद्रदर्शनम्)

अरुन्धती कराभ्यां तां संस्पृश्यास्राकुलेक्षणाम् रुरोद मुनिशार्दूलो भार्यया सुतवत्सलः

arundhatī karābhyāṃ tāṃ saṃspṛśyāsrākulekṣaṇām ruroda muniśārdūlo bhāryayā sutavatsalaḥ

अरुन्धती ने दोनों हाथों से उसे स्पर्श किया और आँसुओं से भरी आँखें देखीं; पुत्रवत्सल मुनिशार्दूल वसिष्ठ अपनी पत्नी के साथ रो पड़े। ऐसा ही संसार में पाश से बँधा पशु-जीव शोक में डूबा रहता है, जब तक मुक्तिदाता पति—भगवान् शिव—की शरण न ले।

अरुन्धतीArundhatī
अरुन्धती:
कराभ्याम्with (her) two hands
कराभ्याम्:
ताम्her
ताम्:
संस्पृश्यhaving touched
संस्पृश्य:
अस्राकुलेक्षणाम्whose eyes were filled/confused with tears
अस्राकुलेक्षणाम्:
रुरोदwept
रुरोद:
मुनिशार्दूलःthe tiger among sages (a great ṛṣi)
मुनिशार्दूलः:
भार्ययाwith (his) wife
भार्यया:
सुतवत्सलःaffectionate toward (his) child
सुतवत्सलः:

Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya)