ग्रहसंख्यावर्णनम् — ध्रुवस्य तपोबलात् ध्रुवस्थानप्राप्तिः
विष्णोराज्ञां पुरस्कृत्य ज्योतिषां स्थानमाप्तवान् एवं ध्रुवो महातेजा द्वादशाक्षरविद्यया
viṣṇorājñāṃ puraskṛtya jyotiṣāṃ sthānamāptavān evaṃ dhruvo mahātejā dvādaśākṣaravidyayā
विष्णु की आज्ञा को अग्र में रखकर ध्रुव ने ज्योतियों के बीच अपना स्थान पाया; इस प्रकार महातेजस्वी ध्रुव ने द्वादशाक्षर विद्या से वह पद प्राप्त किया।
Suta Goswami