ग्रहसंख्यावर्णनम् — ध्रुवस्य तपोबलात् ध्रुवस्थानप्राप्तिः
मम त्वमेकः पुत्रो ऽसि किमर्थं क्लिश्यते भवान् मामनाथामपहाय तप आस्थितवानसि
mama tvamekaḥ putro 'si kimarthaṃ kliśyate bhavān māmanāthāmapahāya tapa āsthitavānasi
“तू मेरा एकमात्र पुत्र है; फिर तू क्यों इस प्रकार कष्ट उठाता है? मुझे अनाथ छोड़कर तू तपस्या में क्यों प्रवृत्त हुआ है?”
Mother of the ascetic son (a grieving maternal voice within Suta’s narrated account)