ग्रहसंख्यावर्णनम् — ध्रुवस्य तपोबलात् ध्रुवस्थानप्राप्तिः
प्राङ्मुखो नियतो भूत्वा जजाप प्रीतमानसः शाकमूलफलाहारः संवत्सरमतन्द्रितः
prāṅmukho niyato bhūtvā jajāpa prītamānasaḥ śākamūlaphalāhāraḥ saṃvatsaramatandritaḥ
पूर्वाभिमुख होकर, संयमित और आत्मनियंत्रित, वह भक्तिभाव से जप करता रहा। शाक, मूल और फल का आहार लेकर, एक वर्ष तक बिना प्रमाद के साधना में स्थिर रहा।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya)