सूर्यरश्मिस्वरूपकथनम्
Surya-Rashmi Svarupa Kathana
शनैश्चरं पुनश् चापि रश्मिर् आप्यायते स्वराट् एवं सूर्यप्रभावेन नक्षत्रग्रहतारकाः
śanaiścaraṃ punaś cāpi raśmir āpyāyate svarāṭ evaṃ sūryaprabhāvena nakṣatragrahatārakāḥ
फिर ‘स्वराट्’ नामक रश्मि शनैश्चर (शनि) को भी पोषित करती है। इस प्रकार सूर्य-प्रभाव से नक्षत्र, ग्रह और तारागण धारण होते हैं; और शैव सिद्धान्त में यह धारण-शक्ति अंततः पति—शिव—की ही है, जो लिङ्ग-तत्त्व रूप से जगत्-नियम को धारण करते हैं।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya)