अग्नित्रय-पितृवंश-रुद्रसृष्टि-वैराग्योपदेशः
धर्मो ज्ञानं च वैराग्यम् ऐश्वर्यं शंकरादिह स एव शंकरः साक्षात् पिनाकी नीललोहितः
dharmo jñānaṃ ca vairāgyam aiśvaryaṃ śaṃkarādiha sa eva śaṃkaraḥ sākṣāt pinākī nīlalohitaḥ
यहाँ धर्म, ज्ञान, वैराग्य और ऐश्वर्य—ये सब शंकर से ही प्रकट होते हैं। वही साक्षात् शंकर हैं—पिनाकधारी, नीललोहित महादेव।
Suta Goswami