सोमवर्णनम्
Graha–Ratha–Aśva Varṇana, Dhruva-Nibaddha Gati, Maṇḍala-Pramāṇa, Graha-Arcana
द्विगुणः सूर्यविस्ताराद् विस्तारः शशिनः स्मृतः तुल्यस्तयोस्तु स्वर्भानुर् भूत्वाधस्तात्प्रसर्पति
dviguṇaḥ sūryavistārād vistāraḥ śaśinaḥ smṛtaḥ tulyastayostu svarbhānur bhūtvādhastātprasarpati
सूर्य के विस्तार से चन्द्रमा का विस्तार दुगुना स्मरण किया गया है। और स्वर्भानु दोनों के तुल्य होकर नीचे की ओर सरकता है, जिससे ग्रहण का कारण बनता है।
Suta Goswami