सूर्यरथनिर्णयः (चन्द्रस्य पक्षवृद्धिक्षयविधानम्)
मासतृप्तिमवाप्याग्र्यां पीत्वा गच्छन्ति ते ऽमृतम् पितृभिः पीयमानस्य पञ्चदश्यां कला तु या
māsatṛptimavāpyāgryāṃ pītvā gacchanti te 'mṛtam pitṛbhiḥ pīyamānasya pañcadaśyāṃ kalā tu yā
एक मास की परम तृप्ति प्राप्त करके और आहुति-रस को पीकर वे पितर अमृतत्व की ओर गमन करते हैं; पितरों द्वारा पीए जाते समय—विशेषतः पंद्रहवीं तिथि को—जो सूक्ष्म कला ग्रहण होती है, वह अत्यन्त प्रभावशाली होती है।
Suta Goswami (narrating Purāṇic teaching on rites and their subtle results)