सूर्यरथनिर्णयः (चन्द्रस्य पक्षवृद्धिक्षयविधानम्)
एकरात्रिं सुराः सर्वे पितृभिस्त्वृषिभिः सह सोमस्य कृष्णपक्षादौ भास्कराभिमुखस्य च
ekarātriṃ surāḥ sarve pitṛbhistvṛṣibhiḥ saha somasya kṛṣṇapakṣādau bhāskarābhimukhasya ca
सोम के कृष्णपक्ष के आरम्भ में, सूर्याभिमुख होकर, समस्त देव पितरों और ऋषियों सहित एक-रात्रि व्रत का अनुष्ठान करते हैं—यह पाशुपत (शिव) के ऋत-धर्म के अनुसार पवित्र कर्म है।
Suta Goswami (narrating the Purana to the sages of Naimisharanya; conveying a calendrical/ritual rule)