भुवनकोशस्वभाववर्णनम् — सप्तद्वीप-पर्वत-लोकविन्यासः तथा यक्ष-उमा-प्रकाशः
संभाविता सा सकलामरेन्द्रैः सर्वप्रवृत्तिस्तु सुरासुराणाम् अहं पुरासं प्रकृतिश् च पुंसो यक्षस्य चाज्ञावशगेत्यथाह
saṃbhāvitā sā sakalāmarendraiḥ sarvapravṛttistu surāsurāṇām ahaṃ purāsaṃ prakṛtiś ca puṃso yakṣasya cājñāvaśagetyathāha
समस्त देवाधिपतियों द्वारा सम्मानित होकर वही देवी देवों और असुरों की समस्त प्रवृत्तियों की प्रेरणा बनीं। तब उन्होंने कहा— “मैं आदिकाल से पुरुष की प्रकृति हूँ; और उस यक्ष-स्वरूप परमेश्वर की आज्ञा के अधीन भी रहती हूँ।”
Suta Goswami (narrating an embedded speech of Devi/Prakriti)