भुवनकोशस्वभाववर्णनम् — सप्तद्वीप-पर्वत-लोकविन्यासः तथा यक्ष-उमा-प्रकाशः
पापिनस्तेषु पच्यन्ते स्वस्वकर्मानुरूपतः अवीच्यन्तानि सर्वाणि रौरवाद्यानि तेषु च
pāpinasteṣu pacyante svasvakarmānurūpataḥ avīcyantāni sarvāṇi rauravādyāni teṣu ca
उन नरकों में पापी अपने-अपने कर्म के अनुसार तपते और ‘पकते’ हैं। और उनमें रौरव आदि से लेकर अवीचि तक सभी नरक स्थित हैं।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya)