भुवनकोशस्वभाववर्णनम् — सप्तद्वीप-पर्वत-लोकविन्यासः तथा यक्ष-उमा-प्रकाशः
प्लक्षद्वीपे तु वक्ष्यामि सप्त दिव्यान् महाचलान् गोमेदको ऽत्र प्रथमो द्वितीयश्चान्द्र उच्यते
plakṣadvīpe tu vakṣyāmi sapta divyān mahācalān gomedako 'tra prathamo dvitīyaścāndra ucyate
अब मैं प्लक्षद्वीप में स्थित सात दिव्य महापर्वतों का वर्णन करता हूँ। उनमें पहला गोमेदक कहलाता है और दूसरा चान्द्र कहा गया है।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya)