भुवनकोशस्वभाववर्णनम् — सप्तद्वीप-पर्वत-लोकविन्यासः तथा यक्ष-उमा-प्रकाशः
तपसा तोषितः पूर्वं मन्दरेण महेश्वरः अविमुक्ते महाक्षेत्रे लेभे स परमं वरम्
tapasā toṣitaḥ pūrvaṃ mandareṇa maheśvaraḥ avimukte mahākṣetre lebhe sa paramaṃ varam
पूर्वकाल में मन्दर के तप से महेश्वर प्रसन्न हुए। अविमुक्त नामक महाक्षेत्र में मन्दर ने परम वर पाया—शिवकृपा, जो पाश को शिथिल कर पशु को पति के पथ पर मोक्ष की ओर ले जाती है।
Suta Goswami (narrating the Purana to the sages at Naimisharanya)