अविद्या-पञ्चक, नवसर्ग-क्रमः, प्रजापति-प्रसवः
Vibhaga 1, Adhyaya 5
सूत उवाच यदा स्रष्टुं मतिं चक्रे मोहश्चासीन्महात्मनः द्विजाश् च बुद्धिपूर्वं तु ब्रह्मणो ऽव्यक्तजन्मनः
sūta uvāca yadā sraṣṭuṃ matiṃ cakre mohaścāsīnmahātmanaḥ dvijāś ca buddhipūrvaṃ tu brahmaṇo 'vyaktajanmanaḥ
सूत बोले—जब अव्यक्त से उत्पन्न महात्मा ब्रह्मा ने सृष्टि करने का संकल्प किया, तब उन पर मोह का आवरण छा गया; और बुद्धिपूर्वक द्विज ऋषियों ने स्रष्टा की अभिप्राय को जानना चाहा।
Suta Goswami