मेरुवर्णनम्—प्रमाण, दिग्विभाग, देवपुरी-विमान-निवासाः
हरेस्तदर्धं विस्तीर्णं विमानं तत्र सो ऽपि च पद्मरागमयं दिव्यं पद्मजस्य च दक्षिणे
harestadardhaṃ vistīrṇaṃ vimānaṃ tatra so 'pi ca padmarāgamayaṃ divyaṃ padmajasya ca dakṣiṇe
वहाँ हरि के विमान के अर्ध-परिमाण तक विस्तृत एक अन्य विमान भी था। वह दिव्य, पद्मरागमय (माणिक्य-निर्मित) था और पद्मज (ब्रह्मा) के दाहिने ओर स्थित था।
Suta Goswami (narrating the Purana narrative to the sages of Naimisharanya)