मेरुवर्णनम्—प्रमाण, दिग्विभाग, देवपुरी-विमान-निवासाः
एवंविधैस्तटाकैश् च नदीभिश् च नदैर्युता विराजते पुरी शुभ्रा तयासौ पर्वतः शुभः
evaṃvidhaistaṭākaiś ca nadībhiś ca nadairyutā virājate purī śubhrā tayāsau parvataḥ śubhaḥ
ऐसे सरोवरों, नदियों और नालों से युक्त वह उज्ज्वल, शुद्ध पुरी शोभायमान है; उसके प्रभाव से वह पर्वत भी शुभ हो उठता है।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya)