सप्तद्वीप-सप्तसमुद्र-वर्णनम् तथा प्रियव्रतवंश-राज्यविभागः
प्रजापतेश् च रुद्रस्य भावामृतसुखोत्कटाः
prajāpateś ca rudrasya bhāvāmṛtasukhotkaṭāḥ
प्रजापति के प्रसंग में रुद्र के वे भाव भी कहे जाते हैं, जो अंतर्भाव के अमृत-रस और उससे उत्पन्न आनंद से तीव्र व उत्कट हैं।
Suta Goswami