प्रलय-तत्त्वलयः, नीललोहित-रुद्रः, अष्टमूर्तिस्तवः, एवं ब्रह्मणो वैराग्यम्
अष्टमूर्तेः प्रसादेन विरञ्चिश्चासृजत्पुनः सृष्ट्वैतद् अखिलं ब्रह्मा पुनः कल्पान्तरे प्रभुः
aṣṭamūrteḥ prasādena virañciścāsṛjatpunaḥ sṛṣṭvaitad akhilaṃ brahmā punaḥ kalpāntare prabhuḥ
अष्टमूर्ति-रूप भगवान् शिव की कृपा से विरञ्चि (ब्रह्मा) ने फिर से सृष्टि रची। इस समस्त जगत् को उत्पन्न करके प्रभु ब्रह्मा प्रत्येक कल्प के अंत में पुनः-पुनः सृजन करते हैं।
Suta Goswami (narrating the cosmological doctrine to the sages of Naimisharanya)