Adhyaya 40: Kali-yuga Lakshana, Yuga-sandhyamsha, and the Re-emergence of Dharma
मन्वन्तरेण चैकेन सर्वाण्येवान्तराणि च व्याख्यातानि न संदेहः कल्पः कल्पेन चैव हि
manvantareṇa caikena sarvāṇyevāntarāṇi ca vyākhyātāni na saṃdehaḥ kalpaḥ kalpena caiva hi
यदि एक ही मन्वन्तर का वर्णन कर दिया जाए, तो उसके बीच के सभी अन्तर भी समझ लिए जाते हैं—इसमें कोई संदेह नहीं। क्योंकि एक कल्प का स्वरूप दूसरे कल्प के समान क्रम से ही स्पष्ट होता है।
Suta Goswami