युगधर्मवर्णनम् — चतुर्युग, गुण, धर्मपाद, तथा वार्तोत्पत्ति
एषा रजस्तमोयुक्ता वृत्तिर् वै द्वापरे स्मृता आद्ये कृते तु धर्मो ऽस्ति स त्रेतायां प्रवर्तते
eṣā rajastamoyuktā vṛttir vai dvāpare smṛtā ādye kṛte tu dharmo 'sti sa tretāyāṃ pravartate
रज और तम से युक्त यह वृत्ति द्वापर युग की कही गई है। आदि कृत युग में तो धर्म स्थित रहता है, और वही धर्म त्रेता युग में भी प्रवर्तित होता है।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya)