क्षुपदधीचिसंवादः — शिलादतपः, वरसीमा, मेघवाहनकल्पे त्रिदेवसमागमः
तपतस्तस्य तपसा संतुष्टो वज्रधृक् प्रभुः शिलादमाह तुष्टो ऽस्मि वरयस्व वरानिति
tapatastasya tapasā saṃtuṣṭo vajradhṛk prabhuḥ śilādamāha tuṣṭo 'smi varayasva varāniti
उसके तप की ज्वाला से प्रसन्न होकर वज्रधारी प्रभु (इन्द्र) आए और शिलाद से बोले—“मैं संतुष्ट हूँ; वर माँगो।”
Suta Goswami (narrating); in-verse speech by Indra to Śilāda