क्षुपदधीचिसंवादः — शिलादतपः, वरसीमा, मेघवाहनकल्पे त्रिदेवसमागमः
मया सह जगत्सर्वं तथाप्यसृजदच्युतः जगन्मयो ऽवहद्यस्मान् मेघो भूत्वा दिवानिशम्
mayā saha jagatsarvaṃ tathāpyasṛjadacyutaḥ jaganmayo 'vahadyasmān megho bhūtvā divāniśam
मेरे साथ समस्त जगत—फिर भी अच्युत ने उसे रचा। वह जगन्मय होकर, दिन-रात मेघ बनकर, हमें निरंतर धारण करता रहा।
Suta Goswami (narrating the Purana’s cosmological account to the sages)