क्षुपस्य विष्णुदर्शनं, वैष्णवस्तोत्रं, दधीचविवादः, स्थानेश्वरतीर्थमाहात्म्यं
तत्त्वमाद्यं भवानेव परं ज्योतिर्जनार्दन परमात्मा परं धाम श्रीपते भूपते प्रभो
tattvamādyaṃ bhavāneva paraṃ jyotirjanārdana paramātmā paraṃ dhāma śrīpate bhūpate prabho
आप ही आद्य तत्त्व हैं, आप ही परम ज्योति हैं। हे जनार्दन, आप परमात्मा और परम धाम हैं—हे श्रीपति, समस्त प्राणियों के भूपति, हे प्रभो।
Suta Goswami (narrating a stuti within the Purana’s dialogue framework)