Adhyaya 35 — दधीचि-क्षुप-युद्धम्, भार्गवोपदेशः, मृतसंजीवनी (त्र्यम्बक) मन्त्रः
पुष्पेषु गन्धवत्सूक्ष्मः सुगन्धिः परमेश्वरः पुष्टिश् च प्रकृतिर्यस्मात् पुरुषस्य द्विजोत्तम
puṣpeṣu gandhavatsūkṣmaḥ sugandhiḥ parameśvaraḥ puṣṭiś ca prakṛtiryasmāt puruṣasya dvijottama
हे द्विजोत्तम! परमेश्वर पुष्पों में गन्ध के समान सूक्ष्म रूप से स्थित हैं—वही सुगन्धि हैं। और क्योंकि वही पुरुष की पुष्टि-शक्ति तथा प्रकृति हैं, वे देहधारियों का अंतरसार होकर पालन करते हैं।
Suta Goswami (narrating the Purana; verse framed as instruction to a dvija within the chapter’s discourse)