ऋषिकृत-रुद्रस्तुतिः तथा संहाराग्नि-प्रश्नः
Kāma–Krodha–Lobha and the Fire of Dissolution
कामः क्रोधश् च लोभश् च मोहो दम्भ उपद्रवः यानि चान्यानि भूतानि स्थावराणि चराणि च
kāmaḥ krodhaś ca lobhaś ca moho dambha upadravaḥ yāni cānyāni bhūtāni sthāvarāṇi carāṇi ca
काम, क्रोध, लोभ, मोह, दम्भ और उपद्रव—तथा अन्य समस्त भूत, स्थावर और चर—ये सब पाश-रूप बन्धन के कारण हैं। जब तक पशु (जीव) पति, भगवान् शिव, की ओर नहीं मुड़ता, तब तक वह संसार में बँधा रहता है।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya, conveying Shaiva doctrine on bondage)