श्वेतमुनिना कालस्य निग्रहः (मृत्युञ्जय-भक्ति-प्रसादः)
क्व शर्वस्तव भक्तिश् च क्व पूजा पूजया फलम् क्व चाहं क्व च मे भीतिः श्वेत बद्धो ऽसि वै मया
kva śarvastava bhaktiś ca kva pūjā pūjayā phalam kva cāhaṃ kva ca me bhītiḥ śveta baddho 'si vai mayā
शर्व के प्रति तुम्हारी भक्ति कहाँ है? पूजा कहाँ है, और पूजा का फल कहाँ? मैं कहाँ, और मुझसे भय कहाँ? हे श्वेत, तुम सचमुच मेरे द्वारा बाँधे गए हो।
Shiva (as Pati, the Lord who binds and liberates)