दारुवनलीला—नीललोहितपरीक्षा, ब्रह्मोपदेशः, अतिथिधर्मः, संन्यासक्रमः
ब्राह्मणा ऊचुः नापेक्षितं महाभाग जीवितं विकृताः स्त्रियः दृष्टो ऽस्माभिर् महादेवो निन्दितो यस्त्वनिन्दितः
brāhmaṇā ūcuḥ nāpekṣitaṃ mahābhāga jīvitaṃ vikṛtāḥ striyaḥ dṛṣṭo 'smābhir mahādevo nindito yastvaninditaḥ
ब्राह्मण बोले—हे महाभाग! अब जीवन भी वांछित नहीं; हमारी स्त्रियाँ विकृत हो गईं। हमने यह भी देख लिया कि जो निन्दारहित महादेव हैं, उन्हीं की निन्दा की गई।
Brahmanas (Brāhmaṇāḥ)