दारुवनलीला—नीललोहितपरीक्षा, ब्रह्मोपदेशः, अतिथिधर्मः, संन्यासक्रमः
धर्मो द्विजोत्तमो भूत्वा जगामाथ मुनेर्गृहम् तं दृष्ट्वा चार्चयामास सार्घ्याद्यैरनघा द्विजम्
dharmo dvijottamo bhūtvā jagāmātha munergṛham taṃ dṛṣṭvā cārcayāmāsa sārghyādyairanaghā dvijam
धर्म ने श्रेष्ठ ब्राह्मण का रूप धारण कर मुनि के गृह में प्रवेश किया। उस निष्कलंक द्विज को देखकर वह अनघा स्त्री ने अर्घ्य आदि से उसका सत्कार-पूजन किया।
Suta Goswami (outer narration, describing the episode)