दारुवनलीला—नीललोहितपरीक्षा, ब्रह्मोपदेशः, अतिथिधर्मः, संन्यासक्रमः
धर्मश्चैव तथा शप्तो माण्डव्येन महात्मना वृष्णयश्चैव कृष्णेन दुर्वासाद्यैर्महात्मभिः
dharmaścaiva tathā śapto māṇḍavyena mahātmanā vṛṣṇayaścaiva kṛṣṇena durvāsādyairmahātmabhiḥ
इसी प्रकार महात्मा माण्डव्य ने धर्म को शाप दिया; और वृष्णिवंश भी कृष्ण तथा दुर्वासा आदि महात्माओं के शाप से ग्रस्त हुआ—प्रभु (पति) की अधीनता में कर्म का विधान अचूक चलता है।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya)