ध्यानयोगेन रुद्रदर्शनम् — रुद्रावतार-परिवर्तक्रमः, लकुली (कायावतार), पाशुपतयोगः, लिङ्गार्चन-निष्ठा
अट्टहासप्रियाश्चैव भविष्यन्ति तदा नराः तत्रैव हिमवत्पृष्ठे अट्टहासो महागिरिः
aṭṭahāsapriyāścaiva bhaviṣyanti tadā narāḥ tatraiva himavatpṛṣṭhe aṭṭahāso mahāgiriḥ
तब वहाँ के लोग शिव के अट्टहास में परम भक्ति करेंगे। उसी हिमवान् की पीठ पर ‘अट्टहास’ नाम का महान् पर्वत स्थित है, जो प्रभु के भय-हरने वाले हास का चिह्न धारण करता है।
Suta Goswami (narrating to the sages of Naimisharanya)