ध्यानयोगेन रुद्रदर्शनम् — रुद्रावतार-परिवर्तक्रमः, लकुली (कायावतार), पाशुपतयोगः, लिङ्गार्चन-निष्ठा
मत्समीपं गमिष्यन्ति पुनरावृत्तिदुर्लभम् सप्तमे परिवर्ते तु यदा व्यासः शतक्रतुः
matsamīpaṃ gamiṣyanti punarāvṛttidurlabham saptame parivarte tu yadā vyāsaḥ śatakratuḥ
वे मेरे समीप पहुँचेंगे और ऐसा पद पाएँगे जहाँ पुनरावृत्ति दुर्लभ हो जाती है। और सातवें परिवर्त में, तब व्यास ‘शतक्रतु’ (सौ यज्ञों के स्वामी) होंगे।
Suta Goswami (narrating the Purva-Bhaga tradition to the sages of Naimisharanya)