ध्यानयोगेन रुद्रदर्शनम् — रुद्रावतार-परिवर्तक्रमः, लकुली (कायावतार), पाशुपतयोगः, लिङ्गार्चन-निष्ठा
सनकः सनन्दनश् चैव प्रभुर्यश् च सनातनः विभुः सनत्कुमारश् च निर्ममा निरहंकृताः
sanakaḥ sanandanaś caiva prabhuryaś ca sanātanaḥ vibhuḥ sanatkumāraś ca nirmamā nirahaṃkṛtāḥ
सनक, सनन्दन, प्रभु और सनातन, तथा विभु और सनत्कुमार—ये सब ममता-रहित, अहंकार-रहित महर्षि थे; वैराग्य में स्थित होकर पशु (बद्ध जीव) को पति—भगवान् शिव की ओर ले जाने वाले मार्ग में प्रतिष्ठित थे।
Suta Goswami (narrating the Purana to the sages of Naimisharanya, recounting the lineage of mind-born sages)